आजकल फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल साइटों पर इस्लाम के विरुद्ध प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. ज्यादातर युवाओं द्वारा इस प्रकार के पोस्ट किये जाते हैं. यह एक गंभीर और सोचनीय विषय है.
हमारे देश में आतंकवादियों और कुछ वर्गों के घटिया विचार के कारण मुस्लिम आबादी शर्मसार हो रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम उन्हें उपेक्षा की दृष्टी से देखें. इससे अपने ही देश के एक समुदाय के लोग अपने आप को अलग महसूस कर रहे हैं.
उस कॉम शिक्षित लोग परेशान हैं, तो अशिक्षितों में भय और द्वेष की भावना पनप रही है. आज जरूरत इस बात की नहीं है कि उन्हें तिरस्कृत नजर से देखें, बल्कि जरूरत है कि हम अपने अंदर सर्वधर्म के सम्मान की भावना पैदा करें. इस तरह की भावना पैदा करने पर ही हमारे देश में विविधता में एकता का सिद्धांत अक्षुण्ण रह सकेगा.
संतोष कुमार सिंह, देवघर
