ग्रीस बोले : जीएसटी मत अपनाओ

डॉ भरत झुनझुनवाला अर्थशास्त्री देश का कॉरपोरेट जगत जीएसटी को लेकर खासा आशान्वित है. कहा जा रहा है कि गहराती वैश्विक मंदी का सामना करने में जीएसटी मददगार होगा. उसी तरह जैसे गाड़ी में डाला गया अच्छा मोबिल आयल पहाड़ी रास्ते में मददगार होता है. सच है कि जीएसटी से अंतरराज्यीय व्यापार सुलभ हो जायेगा […]

डॉ भरत झुनझुनवाला

अर्थशास्त्री

देश का कॉरपोरेट जगत जीएसटी को लेकर खासा आशान्वित है. कहा जा रहा है कि गहराती वैश्विक मंदी का सामना करने में जीएसटी मददगार होगा. उसी तरह जैसे गाड़ी में डाला गया अच्छा मोबिल आयल पहाड़ी रास्ते में मददगार होता है.

सच है कि जीएसटी से अंतरराज्यीय व्यापार सुलभ हो जायेगा और हमारी विकास दर में कुछ सुधार होगा. परंतु इस छोटी सी उपलब्धि के साथ राज्यों की स्वायत्तता छिन जायेगी. आज राज्य अपनी परिस्थिति के अनुसार सेल टैक्स आरोपित करते हैं. जीएसटी लागू होने पर सभी राज्यों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दर से टैक्स वसूल करना होगा.

यूरोपीय देशों ने साझा मुद्रा यूरो बनायी. अपनी मुद्राएं निरस्त कर दीं. अपने केंद्रीय बैंक भी बंद कर दिये. पूरे यूरोप की एकल मुद्रा यूरो का संचालन यूरोपीय केंद्रीय बैंक द्वारा किया जाने लगा. ऐसा ही जीएसटी में अपने देश में प्रस्तावित है.

पूरे देश की सेल टैक्स एवं एक्साइज ड्यूटी व्यवस्था का संचालन केंद्र सरकार द्वारा किया जायेगा. यूरोपीय देशों की मुद्रा के संबंध में निर्णय यूरोपीय केंद्रीय बैंक करने लगा था. इस प्रकार भारतीय राज्यों के सेल टैक्स के संबंध में निर्णय केंद्र सरकार द्वारा किये जायेंगे.

यूरोपीय बैंक का शासन स्वीकार करने का ग्रीस पर जो प्रभाव हुआ है, वैसा ही प्रभाव जीएसटी का अपने देश के कमजोर राज्यों पर होने की पूरी संभावना है. भारत में आज एक दिन की दिहाड़ी लगभग 300 रुपये है, जबकि यूरोप में लगभग 6,000 रुपये. फलस्वरूप यूरोप में बना माल महंगा पड़ता है.

यूरोप के तमाम उद्योग बंद हो चुके हैं, चूंकि विक्रेताओं के लिए भारत और चीन से माल मंगवाना सस्ता पड़ता है. इससे सभी यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में आ गयीं. यह दबाव ग्रीस जैसी कमजोर अर्थव्यवस्था में सीधा दिखने लगा है. ग्रीस की सरकार के खर्च अधिक थे, जबकि आय कम थी. खर्च और आय के अंतर को पाटने के लिए ग्रीस की सरकार ने ऋण लिये. हर नये ऋण के साथ ग्रीस की हालत बिगड़ती गयी. और इस तरह ग्रीस की अर्थव्यवस्था पर संकट छा गया.

आज ग्रीस में बना माल महंगा पड़ रहा है. उद्योग बंद हो रहे हैं. सरकार का राजस्व घटता जा रहा है. ऋण लेकर कुछ माह गाड़ी चलती है, परंतु शीध्र दोबारा संकट पैदा होता जा रहा है.

ऐसे में ग्रीस के लिए आसान रास्ता था कि वह अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर देता. तब ग्रीस का माल विश्व बाजार में सस्ता पड़ने लगता. पाठक ध्यान देंगे कि चीन ने अपनी मुद्रा युआन का ऐसा ही अवमूल्यन हाल में किया है. चीन का माल विश्व बाजार में नहीं बिक रहा था. अपने माल को सस्ता बनाने के लिए चीन ने मुद्रा का अवमूल्यन किया है.

लेकिन ग्रीस अपनी मुद्रा का अवमूल्यन नहीं कर सकता है, चूंकि उसकी अपनी मुद्रा है ही नहीं. घर की बहू अपने बच्चे के भोजन में जरूरी फेरबदल नहीं कर पाती है, यदि किचन की चाबी सास के पास हो. इसी प्रकार ग्रीस अपनी मुद्रा में फेरबदल नहीं कर पा रहा है, चूंकि मुद्रा पर नियंत्रण यूरोपीय केंद्रीय बैंक का है. परिणाम है कि ग्रीस संकट में धंसता जा रहा है, जिसके चलते ग्रीस के प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा. वहां नये चुनाव 20 सितंबर को होने हैं.

जीएसटी का कमजोर राज्यों पर उसी प्रकार का प्रभाव होगा जैसा यूरोपीय यूनियन का ग्रीस पर पड़ा. आज राज्यों को स्वायत्तता है कि अपनी जरूरत के अनुसार माल पर सेल टैक्स बढ़ा सकें या घटा सकें.

हाल ही में दिल्ली सरकार ने तेल पर टैक्स बढ़ा कर इस राजस्व का शिक्षा एवं स्वास्थ सेवाओं के विस्तार में उपयोग करने का निर्णय लिया है. जीएसटी लागू होने के बाद ऐसा नहीं किया जा सकेगा. कमजोर शिक्षा व्यवस्था के चलते जनता में आक्रोश फैले, तो भी मुख्यमंत्री कुछ नहीं कर सकेगा, चूंकि जीएसटी से उसके हाथ बंधे होंगे. मुख्यमंत्री की उसकी कुर्सी चली जाये, तो इसमें आश्चर्य नहीं. केंद्र सरकार ने राज्यों को ग्रीस जैसे संकट में ढकेलने का उपाय जीएसटी में खोज निकाला है.

इसके अतिरिक्त आम आदमी और अमीर द्वारा की जानेवाली खपत में भेद करना जरूरी है. सही पॉलिसी है कि अमीर द्वारा खपत किये जानेवाले माल जैसे कार, फ्लैट, स्क्रीन टीवी एवं स्मार्ट फोन पर टैक्स बढ़ाया जाये और आम आदमी द्वारा खपत किये जानेवाले माल जैसे साइकिल टायर, सूरत की साड़ी, माचिस इत्यादि पर टैक्स घटाया जाये.

लेकिन जीएसटी का सिद्धांत है कि सभी माल पर एक ही दर से टैक्स लगाया जायेगा, जिससे व्यवस्था सरल और विवाद रहित हो. इसलिए जीएसटी से आम आदमी द्वारा खपत की तमाम वस्तुओं के दाम में वृद्धि होगी.

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