आज हमारे देश में जितनी भी आत्महत्याएं हो रही हैं, उनमें सबसे ज्यादातर का कारण प्रेम संबंध है. दरअसल हमारे समाज में आज प्यार के मायने बदल गये हैं. आज के युवा प्रेम को अपना जुनून समझते हैं, जिसे किसी भी हद तक जाकर हासिल कर लेना चाहते हैं.
असफल होने पर गलत कदम उठाने के लिए तत्पर हो जाते हैं. किसी एक को पाने के लिए पूरे परिवार से रिश्ता तोड़ लेना कितना सही है? सही मायने में प्रेम का अर्थ विश्वास और त्याग है.
आजकल के बच्चों को यह बताना बेहद जरूरी है कि वे प्रेम की इस परिभाषा को समझें और आपस में विश्वास पैदा करें. राधा-कृष्ण का प्रेम भी विश्वास और त्याग पर ही टिका था. तभी तो वे वर्षों दूर रह कर भी आसपास ही रहते थे. प्रेम की इस परिभाषा को एक अभिभावक से बेहतर और कौन समझा सकता है?
-मनोरमा सिंह, जमशेदपुर
