समय की मांग है शिक्षित समाज

हमारे समाज में बेरोजगारी, गरीबी, नशाखोरी, डायन-प्रथा, धार्मिक अंधविश्वास, धार्मिक उन्माद, कृषि में पिछड़ापन व राजनीतिक सूझबूझ में कमी जैसी कई समास्याएं व्याप्त हैं. इन समस्याओं के समाधान हेतु सरकार अपने स्तर से प्रयत्नरत है, लेकिन सुधार एवं विकास उस गति से नहीं हो पा रहा है. वर्तमान शिक्षा को लोग मात्र रोजगार प्राप्त करने […]

हमारे समाज में बेरोजगारी, गरीबी, नशाखोरी, डायन-प्रथा, धार्मिक अंधविश्वास, धार्मिक उन्माद, कृषि में पिछड़ापन व राजनीतिक सूझबूझ में कमी जैसी कई समास्याएं व्याप्त हैं. इन समस्याओं के समाधान हेतु सरकार अपने स्तर से प्रयत्नरत है, लेकिन सुधार एवं विकास उस गति से नहीं हो पा रहा है. वर्तमान शिक्षा को लोग मात्र रोजगार प्राप्त करने का साधन समझते हैं. हर शिक्षित व्यक्ति सरकारी नौकरी पाना चाहता है, जो संभव नहीं है.

अत: शिक्षा पद्धति को बहुअयामी बनाने की आवश्यकता है. समाज में अधिकतर लोग अच्छी शिक्षा के अभाव में गरीबी में जीवन बिता रहे हैं. चूंकि शिक्षित व्यक्ति अपने व परिवार का बेहतर गुजारा कर लेते हैं, अत: समाज के हर व्यक्ति को शिक्षित करना अति आवश्यक है. शिक्षित लोग हर बुराई से निबट लेते हैं, ऐसे में शिक्षित समाज समय की मांग है.

– बीके हेंब्रोम, ई-मेल से

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