आज आरक्षण के नाम पर भारत में आंदोलन चल रहे हैं. अनेक जातियां आरक्षण की मांग पर अड़ी हैं. वोट बैंक की वजह से राजनीतिक पार्टियां हिम्मत नही जुटा पाती हैं आरक्षण को लेकर कोई ठोस निर्णय लेने की.
भारत के संविधान के अनुच्छेद 15(1) में स्पष्ट रूप से यह लिखा है कि राज्य जाति, धर्म, लिंग, नस्ल और जन्म स्थान को लेकर किसी के साथ भेदभाव नही करेगा. अनुच्छेद 16(4) में आरक्षण के कानून बनाने का अधिकार भी राज्य को दिया गया है, लेकिन इसमें पिछड़ी जाति का उल्लेख नहीं किया गया है, बल्कि पिछड़ा वर्ग का उल्लेख किया गया है.
राजनीति में वोट बैंक के लिए जाति आधारित आरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है. देश की संपन्न जातियां भी एकजुट होकर आरक्षण की मांग करने लगी हैं. आरक्षण का लाभ किसे मिल रहा है?
– प्रताप तिवारी, इ-मेल से
