योग का इतिहास बहुत ही पुराना है. योग विद्या पहले ऋषि-मुनियों द्वारा गुफाओं एवं कंदराओं में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत अंतरित की जाती थी. साथ ही वैदिक काल से ही योग के प्रसांगिक होने के साक्ष्य मिलते हैं.
स्वामी शिवानंद ने 1925 में ही भारत भ्रमण के दौरान सत्य सेवाश्रम औषधालय की स्थापना की थी. उसी समय इन्होंने योग, स्वास्थ्य तथा अध्यात्मिक जीवन पर दो सौ से अधिक पुस्तकों का प्रणयन किया था. योग का संबंध शरीर, मन एवं आत्मा तीनों से है.
मुख्य रूप से हम अष्टांग योग को जीवन में उतारने का प्रयत्न करते हैं, जो यम, नियम, आसन, प्रणयाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं. आध्यात्मिक, सांस्कृतिक बिहार की धरती पर भी योग की लंबी परंपरा रही है, लेकिन सामान्यत: साधकों को उपलब्ध इस ज्ञान को स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने जन-जन तक पहुंचा दिया.
– रुपक कुमार सिंह, हॉसी केवल, भगवानपुर, वैशाली
