अंगरेज को देश से बाहर खदेड़ने के लिए आंदोलन तो सभी ने सुना होगा, पर अपनों के खिलाफ अपनों को ही आंदोलन करते हुए क्या आपने देखा और सुना है?
एक ऐसा आंदोलन है, जिसे लोगों ने देखा भी है और सुना भी. यह आंदोलन झारखंड को बिहार से अलग करनेवाला आंदोलन था. हालांकि, मैं झारखंड विरोधी नहीं हूं, लेकिन बिहार से झारखंड को अलग करने का मकसद ही पिछड़े क्षेत्र में विकास करना था.
झारखंड जब अलग हो रहा था, तब कई लोगों को बंदी बनाया गया था. कई प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाई गईं. मगर आज जब लाठी खानेवाले लोग पीछे मुड़ कर देखते हैं, तो यही लगता है कि वे पहले जहां खड़े थे, आज भी वहीं विराजमान हैं.
दक्षिणी छोटानागपुर, संताल परगना, कोल्हान आदि के जिस विकास के लिए झारखंड को अलग किया गया, आज भी यह क्षेत्र अपने विकास को तरस रहा है.
अत: सरकार से निवेदन है कि वह बीते वर्षो में हुए झारखंड के लिए हुए आंदोलन को सार्थक बनाते हुए सूबे के विकास की ओर ध्यान देने का भी कष्ट करें.
पालूराम हेंब्रम, सालझागिरी
