डर के साये में कब तक जियेंगे हम?

देश में महिलाओं, युवतियों और बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का मामला दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है.देश की राजधानी दिल्ली में हुए 16 दिसंबर के हादसे की आवाज आज तक हमारे कानों में गूंज रही है. फिर भी हम रोजाना देश के किसी न किसी कोने में यौन उत्पीड़न के मामले के बारे में […]

देश में महिलाओं, युवतियों और बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का मामला दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है.देश की राजधानी दिल्ली में हुए 16 दिसंबर के हादसे की आवाज आज तक हमारे कानों में गूंज रही है. फिर भी हम रोजाना देश के किसी न किसी कोने में यौन उत्पीड़न के मामले के बारे में देखते, सुनते और पढ़ते हैं.
आज हम यह सोचने पर मजबूर हो गये हैं कि आखिर वह दिन कब आयेगा, जब हम निर्भीक होकर समाज में अपना जीवन बसर करेंगे? आज देश में बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में 61 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. यदि सरकार ने इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया, तो स्थिति भयावह होने में देर नहीं लगेगी.
फिर कोई दामिनी वहशियों के हवस की शिकार होगी तो देश में और आक्रोश फैलेगा. इस प्रकार के हादसों के पहले ही उपाय कर लिये जाने चाहिए.
मनोरमा सिंह, जमशेदपुर

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