देवघर में श्रवणी मेला की दूसरी सोमवारी को हुई भगदड़ के बाद डीसी एवं एसपी को निलंबित किया जाना, उन्हें बलि का बकरा बनाये जाने के समान है.जिस प्रकार से भीड़ बढ़ी, लोगों ने उसकी कल्पना भी नहीं की थी. बरहहाल, इस दुखद घटना के बाद जिस प्रकार सरकार जागी, वह पहले ही जाग जाती, तो शायद यह दिन देखने को नहीं मिलता.
घटना के बाद जिस प्रकार सरकारी तंत्र ने बाबा की नगरी में कैंप किया, यदि इस प्रकार का कैंप पहले से किया जाता और एहतियातन उपाय किये जाते, तो दुर्घटना को बहुत हद तक टाला जा सकता था.
दुखद बात यह भी है कि इस हादसे के बाद सरकार ने आनन-फानन में कार्रवाई कर तो दिया, लेकिन यहां की व्यवस्था में कोई आमूल परिवर्तन नहीं हुआ. सरकार को चाहिए कि वह मेला लगने से पहले सभी बिंदुओं पर विचार कर ले.
शंभूनाथ सहाय, देवघर
