फूलों से खुशबू चुरा कर
तेरा जीवन मैं महकाऊं
तितलियों से रंगें मंगवा कर
जीवन तेरा मैं रंग जाऊं
जब-जब तेरी आंखें रोये
आंसू तेरा मैं बन जाऊं
बिखर के होठों पर मैं तेरी
मुसकान बन कर सज जाऊं
लाखों में एक है मेरी गुड़िया
फिर क्यों न मैं यूं इतराऊं?
बांधी है तुमने रेशम की डोरी
तुझसे जीवन भर बंध जाऊं
नंदन कुमार, सीतामढ़ी
