स्कूलों में, खासकर केंद्रीय विद्यालयों में थ्योरी के अनुसार नियम तो बहुत बनाये जाते हैं, मगर इन छोटे-छोटे नियमों का पालन कहां हो पाता है. इसी तरह कितने नियम सिर्फ अभिभावकों को दिखाने के लिए बनाये जाते हैं.
नतीजन, पिछली बेंचों पर बैठनेवाले बैक-बेंचर ही बन कर रह जाते हैं. डर के मारे वे न अपनी तकलीफों को किसी से कह पाते हैं और न अपनी कमियों को दूर करते, जबकि दबंग छात्र बचपन से ही उन्हें दबाते चले जाते हैं.
शिक्षक भी स्कूलों में सारे नियमों का पालन करने में असमर्थ दिखते हैं. अत: स्कूलों में नियमों के पालन के लिए प्रत्येक दिन नहीं, तो हफ्ते में एक दिन अभिभावक को दायित्व सौंपा जाये.
इसके साथ ही स्कूलों की निगरानी करनेवाला अभिभावक सरकारी अधिकारी के अन्य अभिभावकों रिपोर्ट सौंपे. तभी हमारे बच्चे ठीक से शिक्षा ग्रहण कर पायेंगे.
सत्य प्रकाश भारतीय, कोलकाता
