बदहाल शिक्षा और बेहाल सरकारी तंत्र

बात झारखंड के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों और यहां के सरकारी शिक्षा तंत्र की है. यहां के शिक्षकों से पढ़ाई कम तथा बेगारी ज्यादा करायी जाती है.उन्हें स्कूल भवन निर्माण, मध्याह्न् भोजन, ड्रेस वितरण, साइकिल वितरण, पुस्तक वितरण, छात्रवृत्ति वितरण, जनगणना, मतदाता सूची संबंधी आदि कार्यो में लिप्त रखा जाता है. एक तो इन सरकारी […]

बात झारखंड के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों और यहां के सरकारी शिक्षा तंत्र की है. यहां के शिक्षकों से पढ़ाई कम तथा बेगारी ज्यादा करायी जाती है.उन्हें स्कूल भवन निर्माण, मध्याह्न् भोजन, ड्रेस वितरण, साइकिल वितरण, पुस्तक वितरण, छात्रवृत्ति वितरण, जनगणना, मतदाता सूची संबंधी आदि कार्यो में लिप्त रखा जाता है.

एक तो इन सरकारी स्कूलों में नियमति शिक्षकों की वैसे ही कमी है, ऊपर से जो पारा शिक्षक बहाल किये गये हैं, उनका मानदेय भी नाम मात्र का ही दिया जाता है.

इतनी रकम में उनके परिवार का भरण-पोषण भी ठीक से नहीं हो पाता. आये दिन उन्हें भी हक पाने के लिए ज्यादातर समय हड़तालों और अनशनों में ही देना पड़ता है.

बात नियमति शिक्षकों की हो, तो उनकी संख्या औसतन एक से दो शिक्षक प्रति स्कूल होगी. ऐसे में वे पढ़ाएं या सरकारी बेगारी करें.

चंद्रशेखर, करमा, चतरा

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