दाना न पानी, खरहरा दूनौ जून!

चंचल सामाजिक कार्यकर्ता पानी बरसे दरभंगा में, छाता खुले दुबई में? इ सब का होय रहा है, न हम्मे मालुम है न उसको, जो हर रोज नया फरमान जारी किये जाय रहा बा. किसमें दम है कि कह दे कि राजा ढांक लो, नीचे नंगे हो. आपन घर फूंक के, दूसरे क दालान बनाय रहा […]

चंचल
सामाजिक कार्यकर्ता
पानी बरसे दरभंगा में, छाता खुले दुबई में? इ सब का होय रहा है, न हम्मे मालुम है न उसको, जो हर रोज नया फरमान जारी किये जाय रहा बा. किसमें दम है कि कह दे कि राजा ढांक लो, नीचे नंगे हो. आपन घर फूंक के, दूसरे क दालान बनाय रहा है? पंडा बिहार में, मंदिर बनी दुबई में? कहो फलाने, जे सुनी ऊ का कही?
नवल उपधिया बौखलाये हैं. एक सांस में कई सवाल दाग दिये. यह देश की संसद थोड़े ही है कि एक साथ कई सवाल पूछना वर्जित है और अगर पूछ दिये तो संसद से बाहर. यह तो गांव की संसद है. जित्ता चाहो सवाल उठाओ. तरतीब हो कि न हो, कुछ भी बोलो, कितना भी भदेस बोलो, कोई रोक नहीं. कीन उपधिया समझ गये कि नवल जो भी कह रहा है, वह कीन के खिलाफ या फिर कीन की पार्टी के खिलाफ ही बोलेगा, यह उसकी हिस्ट्री है.
उसे पता नहीं क्यों ‘दिया’ से नफरत है, चुनांचे कीन ने नवल को रोका- ई पंडा बिहार में ही होते हैं, काशी-मथुरा में नहीं? कुछ सोच-समझ के बोला करो.. नवल ने आंख गोल करके कीन को देखा. मुंह खोले नहीं, लेकिन उसे भरपूर ढंग से कान की तरफ ले गये, जितना ले जा सकते थे. नवल की इस हरकत से कीन को दिक्कत होती है, उन्हें लगता है कि यह चिढ़ाने के लिए किया जा रहा है.
बीच में कयूम मियां आ गये- अकल के गरीबों! रुख-ताल देख कर बोला करो, जैसे देश का नेता बोलता है. बोले जा रहा है. नवल ने फिर टोका- कहां बोले जा रहा है, संसद में तो कुछ नहीं बोला.
कयूम मुस्कुराये- बरखुरदार, यह भी नहीं जानते कि बोलने की एक तरकीब होती है और यह तरकीब देश-काल और परिस्थिति पर निर्भर करती है. अब मेढक और ङिांगुर को देखो- गर्मी में कभी इन्हें बोलते सुने हो या सर्दी के समय मोर की आवाज सुने हो? नहीं न? तो ऐसा ही समझ लो.
जो बात दिल्ली में बोली जाती है, वही बिहार में नहीं. संसद में केवल बोला ही नहीं जाता, सुनना भी पड़ता है, और हमारे नेता को सुनने की आदत नहीं है बस. कब-कहां-क्या बोलना है, उसे समझा करो.
पिछले चुनाव में इसी बिहार में तुम्हरे नेता ने नया इतिहास नये तरह से बोला था. जनता-जनार्दन ने ताली पीटा था. जनता ने भदेस बात पर ताली पीटा या खुश होकर कि चलो तक्षशिला जो बंटवारे में पाकिस्तान में ही फंसा रह गया था, अब नालंदा तो आ गया. जनता को कौन भांप पाया? केवल ‘बक्सा’ ने उसे दिखाया और बताया कि जनता हर बात पर ताली पीट कर स्वागत करती रही.
देश ने डिब्बे की बात तो मान ली, लेकिन भीड़ में हरखू झा की आवाज दबी ही रह गयी, जब उन्होंने कहा हुजूर तक्षशिला बिहार में नहीं पाकिस्तान में है. हरखू जी की आवाज को डिब्बे ने नहीं सुना, क्योंकि हरखू के पास न तो दो करोड़ का मंच था, न ही आठ करोड़ की लागत से प्रायोजित जलसे के लिए रकम थी.
नयी बात सुनो. ठीक चुनाव के ऐन मौके पर कहा जा रहा है कि बिहार को कई लाख करोड़ का पैकेट दिया जायेगा.अब गणित देखो, लिखा है- 40,000 करोड़+1.25 करोड़= 1,65,000 करोड़. यह नया गणित है. अब लगाते रहो कि कितने शिफर आते हैं इस रकम में? उत्तर देगा वजीरे खारजा जेटली, कि सरकार ने थोड़े ही कहा कि इतनी रकम बिहार को जायेगी. दूसरा रफूगर बोलेगा, यह तो जुमला था. इसे कहते हैं आज की राजनीति. यही राजनीति जनता को पसंद है, तो हम का करें?
चिखुरी चुपचाप सुन रहे थे, बोले- सुनो जनता पर आरोप मत लगाओ. वह झांसे में आ गयी, लेकिन कितनी बार आयेगी? अब वह अपने हकूक को सामने रख कर नेता को तौलेगी. वह हर फरेब से रूबरू हो चुकी है.
एक तरफ तो सरकार कहती है, हमे खाली खजाना मिला है और दूसरी तरफ खैरात बांट रही है. तो क्या लाखों करोड़ अपनी जेब से बांट रहे हो? यह संसद नहीं है, बिहार है और बिहार ठोंक-बजा कर चलेगा. नया जुमला फेंक रहे हो दुबई में मंदिर बनेगा. अपने यहां मसजिद गिराके वहां मंदिर बनाओगे? तुम्हारी अंतरराष्ट्रीय समझ कितनी है, दुनिया देख रही है. आज एक भी मुल्क अपने साथ नहीं है.
दस लाख का परिधान पहन कर ओबामा-ओबामा करते रह गये, यह भूल गये कि एक महात्मा था, जो एक धोती पहन कर बरतानिया निजाम को बदलवा दिया और भारतीय लिबास में ही पूरे अंगरेज कौम का पसंदीदा मेहमान बन गया. इस मुल्क को अगर कोई बना सकता है, तो वह सिर्फ गांधी है.
उमर दरजी ने पूछा- लेकिन बिहार में कांग्रेस..?
चिखुरी मुस्कुराये- वाम और संघ को छोड़ कर बाकी जितने भी हिंदी पट्टी में हैं, सब गांधी की ही औलाद हैं. इस बार बिहार में गांधी ही लड़ेगा. रूप कुछ भी हो. चंपारण फिर इतिहास लिखने जा रहा है.
लड़ाई हिटलर और गांधी के बीच है. हिटलर की झूठ, उसकी चमक-दमक, रथ और विमान सब ध्वस्त होंगे, जब बिहार उठ खड़ा होगा. नवल आज बगैर किसी गाने का मुखड़ा उठाये किसी विचार में मग्न होकर चलते बने..

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >