सरहद पर तनाव

जम्मू-कश्मीर से लगी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से आठ अगस्त से हो रही गोलाबारी में अब तक छह भारतीय नागरिकों के मारे जाने और कम-से-कम 15 लोगों के घायल होने की खबर है. इससे पहले 30 जुलाई को एक सैनिक और चार अगस्त को एक नागरिक की मौत हो […]

जम्मू-कश्मीर से लगी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से आठ अगस्त से हो रही गोलाबारी में अब तक छह भारतीय नागरिकों के मारे जाने और कम-से-कम 15 लोगों के घायल होने की खबर है.
इससे पहले 30 जुलाई को एक सैनिक और चार अगस्त को एक नागरिक की मौत हो चुकी है. विदेश मंत्रलय द्वारा पाकिस्तानी उच्चायुक्त को तलब करने के बाद भी पाकिस्तानी सेना की नापाक हरकतें जारी हैं. ऐसे माहौल में भारत को भी जवाबी कार्रवाई के लिए विवश होना पड़ रहा है. दोनों देशों में स्वतंत्रता दिवस उत्सव के मौके पर और 23 व 24 अगस्त को होनेवाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक से पहले हो रही ऐसी घटनाओं से तनाव बढ़ना स्वाभाविक है.
लेकिन, पाकिस्तान ने अपनी गलती सुधारने के बजाय भारत पर ही जुलाई से अब तक 70 बार युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप मढ़ दिया है. भारत में आतंकी घटनाओं को शह देनेवालों को संरक्षण देने के साथ सीमा व नियंत्रण रेखा पर उकसावे की पाकिस्तानी हरकतें पिछले कई वर्षों से लगातार जारी हैं. 2011 से 2014 के बीच युद्धविराम उल्लंघन की 1,106 घटनाएं हुई थीं. इस वर्ष जून तक उसने 199 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है.
2011 से 2013 के बीच गोलीबारी मुख्य रूप से नियंत्रण रेखा पर केंद्रित रही थी, पर 2014 में 74 फीसदी ऐसी घटनाएं पंजाब, गुजरात और राजस्थान से लगी सीमा पर हुईं. 2012 से 2014 के बीच घुसपैठ के 945 मामले दर्ज किये गये थे. इस वर्ष जून तक ऐसी 42 वारदात हो चुकी हैं. उधमपुर में धरा गया आतंकी नावेद पाकिस्तानी के भारत-विरोधी छद्म युद्ध का जीता-जागता उदाहरण है.
इन हरकतों के बावजूद भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखने की कोशिशें कर संयम का परिचय दिया है. स्वाभाविक रूप से भारत में अनेक लोग बातचीत बंद कर पाकिस्तान के विरुद्ध कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन, कूटनीतिक और राजनीतिक प्रयासों के जरिये पाकिस्तान पर दबाव बनाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उसके नापाक इरादों को बेनकाब करने की गंभीर कोशिशें जारी रहनी चाहिए.
पाक सेना और शासन के भारत-विरोधी तत्व अतिवादी संगठनों के साथ मिल कर दक्षिण एशिया में अशांति का माहौल बनाये रखना चाहते हैं. कश्मीर से लेकर अफगानिस्तान तक इनके इरादों पर अंकुश लगाने के लिए भारत को प्रयासरत रहना होगा. उम्मीद है कि युद्धोन्माद के पैरोकारों की परवाह किये बिना दोनों देश अमन-चैन की बहाली की ठोस पहल करेंगे.

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