बचानेवाले को न हो परेशानी

किसी भी देश में सड़कों का विकास, विकास के अहम बिंदुओ में से एक है. भारत के सभी राज्यों में सड़कों का समुचित विकास हुआ और हो भी रहा है. आज लगभग सभी गावों से शहर तक सड़क मिल चुकी है. परिवहन के साधनों का विकास भी खूब हुआ है. सबों के लिए अच्छा हुआ. […]

किसी भी देश में सड़कों का विकास, विकास के अहम बिंदुओ में से एक है. भारत के सभी राज्यों में सड़कों का समुचित विकास हुआ और हो भी रहा है. आज लगभग सभी गावों से शहर तक सड़क मिल चुकी है. परिवहन के साधनों का विकास भी खूब हुआ है. सबों के लिए अच्छा हुआ.
वाहनों का तेज गति से चलना लाजिमी है. तेज गति और कभी-कभी अति तेज गति दुर्घटनाओं के कारण बन किसी-न-किसी का जीवन समाप्त कर देती है. जब कोई व्यक्ति दुर्घटना का शिकार बन होता है, तो उनको देखनेवाला कोई नहीं होता. लोग बगल से गुजरते रहते हैं. उनकी चीख निकलती रहती है. कोई पानी तक देनेवाला नहीं होता है. यह कष्ट की बात है.
यह मानवीय गुणों के विरु द्ध है. ऐसा करना अच्छा नहीं है. मगर सोचने की बात यह है कि ऐसी परिस्थिति में कई निदरेष इनसान भी पिस गये हैं. कई इनसान मुकदमे लड़ रहे हैं. बचाने के मूल्य में सजा भुगत रहे हैं. व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है.
नारायण झा, मधेपुर, मधुबनी

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