एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सहित देश के विभिन्न महानगरों में बरसात के दिनों में जाम से प्रति वर्ष करीब 600 अरब रुपये की हानि होती है. इसमें फंसे वाहनों का 20 प्रतिशत ईंधन अधिक अलग से खर्च होता है.
यह तो सिर्फ मोटे हिसाब की बात है. मगर इसके अलावा, जाम हादसों में न जाने कितने जान-माल का नुकसान अलग से प्रति वर्ष होता है, जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. ऐसा देश के अन्य शहरों में भी होता है.
इन बेलगाम जाम-हादसों से निजात पाने के लिए तो विकेंद्रीकरण की नीति के साथ जनसंख्या नियंत्रण पर सबके लिए समान कानून और निजी परिवहन व्यवस्था की जगह सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और खुले व हरे-भरे मास्टर प्लान की सख्त जरूरत है, जिसे सरकार इस घोर पूंजीवादी व्यवस्था के तहत लागू कर पाने में फिलहाल असमर्थ दिखती है.
वेद प्रकाश, दिल्ली
