15 अगस्त देश के लिए खुशी, उत्साह, नाचने-गाने और झूमने का दिन है, क्योंकि इसी दिन हम आजाद हुए थे. यह देश की प्रतिभा, संस्कृति, परंपरा आदि को रंगमंच पर प्रस्तुत करने का दिन है.
यह विडंबना ही है कि आजादी के नाम पर कुछ विशेष स्थानों को छोड़ कर हम पूर्ण रूप से आजादी का जश्न भी नहीं मना पाते. कहने का तात्पर्य है कि आजादी के नाम पर केवल दिखावे के लिए अपने तिरंगे को लहराना और मिठाइयां बांटने से नहीं है, अपितु देश की गौरवमयी संस्कृति, परंपरा, धर्म और अमर वीर सपूतों की बलिदान की गाथा से अपनी नयी पीढ़ी को अवगत कराने से है.
कहा जाता है कि नयी पीढ़ी, देश के भविष्य-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है. हमें झंडोत्तोलन के बाद बच्चों को अपने देश की सभ्यता, संस्कृति और संस्कार से परिचित कराना होगा.
ओम प्रकाश प्रसाद, हुगली
