खेल से जीवन में आनंद, स्फूर्ति और ताजगी की अनुभूति होती है. खेल कोई भी हो, अगर उसे सही तरीके से खेला जाये, तो उससे शारीरिक के साथ मानसिक विकास भी होता है.
लेकिन हाल के दिनों में क्रि केट के आइपीएल प्रारूप में जो अभद्रता और अनियमितता देखी गयी, उससे खेल के उद्देश्य और धारणा को ठेस पहुंची है.
साथ ही खेल प्रेमियों के मन में अविश्वास भी भावना भी विकसित हुई है. मैच फिक्सिंग से लेकर कालेधन की बौछार से खेल भावना पर असर पड़ा है. इससे स्पष्ट हो रहा है कि खेल भी अब पैसा कमाने का एक बड़ा जरिया बन गया है.
अदालत द्वारा टीमों के मालिकों को खेल से दूर करने के फैसले से नयी आशा जगी है कि खेल में फिर से चरित्रवानों का बोलबाला होगा. ऐसा होना भी जायज है, क्योंकि खेल में चरित्रवान होना बेहद जरूरी है.
मनोज आजिज, जमशेदपुर
