क्या यह सच नहीं है कि हमारे राष्ट्रनेताओं अथवा राजनेताओं ने उदघाटनों और भाषणों से देश को बरबाद करने में अहम भूमिका निभायी है? क्या कभी राजनेता या उनके पुत्र ने देश के दुश्मनों के साथ संघर्ष करते हुए प्राणोत्सर्ग किये?
क्या कभी उन्हें वीरतापूर्ण सम्मानों और चक्रों से सुशोभित किया गया? देश आज भ्रष्ट नेताओं, उनके पिट्ठू अधिकारियों की करतूतों, दुराचारों व पापों को भोग रहा है. देश की शक्ति, खुशहाली और शांति आज दावं पर लगी है. चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश की सीमाओं पर उत्पात मचा रहे हैं.
घोर रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, कालाबाजारी और बेरोजगारी से देश का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है. सत्ता भोग, राजभोग और कुर्सी का शौक नेताओं का आदर्श बन गया है. सभी मूक दर्शक और जनता के भक्षक बनते जा रहे हैं. ऐसे में क्या देश सुधरेगा?
स्वामी गोपाल आनंद, रजरप्पा पीठ
