अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के लिए कम पड़ रहे फंड के लिए लोगों से चंदा देने की अपील की. आम आदमी पार्टी का तरीका अन्य दलों की अपेक्षा अलग और पारदर्शी है. अगर इसके सकारात्मक पक्ष की बात की जाये तो ‘आप’ ने अभी तक नैतिकता ताक पर नहीं रखी.
अन्य दलों के तरीकों से अपने को दूर रखा. क्यों कि कोई भी व्यक्ति जब बेहिसाब चंदा देगा, तब सत्ता में आने के बाद चार गुना फायदा वसूलना चाहेगा. जो भ्रष्टाचार की जननी है.
वहीं ‘आप’ में फंड की कमी का नकारात्मक तथ्य यह है कि केजरीवाल ने अपनी लोकप्रियता गिरायी है. प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसे नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा कर विश्वास का संकट खड़ा किया है. इससे लोगों की नजरों में ‘आप’ का मान घटा है. पार्टी को और भी संसाधन की कमी होगी. केजरीवाल को पुराना रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए.
जंग बहादुर सिंह ,गोलपहाड़ी
