डिजिटल इंडिया की सफलता पर संदेह

देश में डिजिटल इंडिया सप्ताह शुरू है. निस्संदेह यह एक बेहतर परिकल्पना है, लेकिन निकट भविष्य में इसकी पूर्ण सफलता संदिग्ध है. इसके पीछे कई कारण हैं. निश्चय ही हम नवपद्धति के प्रवर्तन में मजबूत हैं, लेकिन उसके उपयोग के लिए बुनियादी ढांचा भी महत्वपूर्ण है. ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता संदेहास्पद है. इसका […]

देश में डिजिटल इंडिया सप्ताह शुरू है. निस्संदेह यह एक बेहतर परिकल्पना है, लेकिन निकट भविष्य में इसकी पूर्ण सफलता संदिग्ध है. इसके पीछे कई कारण हैं. निश्चय ही हम नवपद्धति के प्रवर्तन में मजबूत हैं, लेकिन उसके उपयोग के लिए बुनियादी ढांचा भी महत्वपूर्ण है.
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता संदेहास्पद है. इसका प्रमाण जनगणना में एकत्र आंकड़े हैं. हमारे देश में लगभग 28 प्रतिशत लोगों के पास न तो मोबाइल है और न ही लैंडलाइन. ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि कंप्यूटर एवं इंटरनेट के अन्य संसाधनों की स्थिति क्या हो सकती है.
दूसरी बड़ी वजह हमारी तकनीकी शिक्षा पद्धति में दोष है. किताबी ज्ञान में छात्र निपुण हैं, लेकिन व्यावहारिक ज्ञान न के बराबर. थ्योरी और प्रैक्टिकल के बीच एक बड़ी खाई पनप चुकी है जिसे पाटना असंभव प्रतीत होता है.
प्रणव प्रकाश मिश्र, ई-मेल से

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