देश के ‘प्रधान सेवक’ व भाजपानीत सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी को सत्ता की बागडोर संभाले एक साल हो गये. साल भर के लेखा-जोखा में सरकार के पास गिनाने को अनेक उपलब्धियां हो सकती हैं, लेकिन उन उपलब्धियों में जनता के नफा-नुकसान की कोई गारंटी नहीं है.
केंद्र सरकार द्वारा जनहित की घोषणाएं तो की गयी हैं, लेकिन इनसे जनता को कितना लाभ होगा, इस पर संशय बरकरार है. मोदी सरकार ने शुरू किये गये अभियानों को इतनी हवा दी, मानो आसमान से तारे तोड़ कर जमीन पर ला दिये हों. इसी करिश्मे ने मोदी की लोकप्रियता को साठ प्रतिशत से ऊपर पहुंचा दिया है.
यह मीडिया के हिसाब से सही हो सकता है, लेकिन देश के आम नागरिक की सुविधा के लिए लिहाज से कतई सही नहीं है. योजनाओं का अभी तक पीटा गया ढिंढोरा झूठे सेहरों से कम नहीं है. उन्हें इससे बचना चाहिए.
बैजनाथ प्रसाद महतो, हुरलुंग, बोकारो
