बिहार में राजनीतिक व आर्थिक संतुलन बनाने और लोगों में सरकार के प्रति विश्वास पैदा करने में नीतीश कुमार ने काफी हद तक सफलता हासिल की थी. लोकसभा चुनाव के परिणाम और उसमें मिली हार की व्यावहारिक जिम्मेदारी लेने के बाद जीतन राम मांझी को कुर्सी सौंपने और नीतीश कुमार के दोबारा सीएम बनने के बाद काफी आलोचना हुई.
उनकी निर्णय क्षमता पर सवाल उठाये गये. साथ ही बिहार के एक राजनीतिक कुनबे ने उनके प्रति अपनी सोच में खासी नाराजगी जाहिर की. चुनाव के ठीक पहले नीतीश कुमार ने राजद से हाथ मिला लिया.
जब वे इस गंठबंधन के बाद भाषण देते हैं, तो बिहार की जनता को डेढ़ दशक पूर्व राज्य की बर्बादी के लिए राजद के विरोध में कही गयी बातें याद आ जाती हैं. कुछ महीने शेष हैं, नीतीश और जनता के संबंधों से परदा उठ जायेगा.
अनुराग कुमार मिश्र, लातेहार
