आपदा से बचाव को ठोस कदम उठाने की जरूरत

समूचा देश अभी महाप्रलय की दौर से गुजर रहा है. मुंबई, पुणे और पटना जैसे महानगरों में आर्थिक धनकुबेरों, राजनीतिक मठाधीशों के साथ देश के नीति-निर्माताओं के आशियाने भी इस जलप्रलय की चपेट में हैं. निःसंदेह यह एक प्राकृतिक आपदा है तथा इस तरह की आपदा से कोई देश वंचित भी नहीं है. लेकिन, इसकी […]

समूचा देश अभी महाप्रलय की दौर से गुजर रहा है. मुंबई, पुणे और पटना जैसे महानगरों में आर्थिक धनकुबेरों, राजनीतिक मठाधीशों के साथ देश के नीति-निर्माताओं के आशियाने भी इस जलप्रलय की चपेट में हैं.
निःसंदेह यह एक प्राकृतिक आपदा है तथा इस तरह की आपदा से कोई देश वंचित भी नहीं है. लेकिन, इसकी आड़ में हम प्रकृति पुत्र अपनी प्रकृति विरोधी कारगुजारियों को छुपा नहीं सकते. हाल ही में दुनिया के कई छोटे-छोटे देश पर्यावरण के क्षेत्र में कई उदाहरण पेश किये हैं, जो काबिल-ए-तारीफ हैं. इसका अच्छा असर भी देखने को मिला है.
अतः भारत को भी इन देशों की गतिविधियों और शोधों से सीख लेने की जरूरत है. भारत एक विशाल आबादी वाला देश है, जहां इस तरह की आपदाओं के दुहराव से अन्य देशों की अपेक्षा अधिक जान-माल की क्षति होती है. इसलिए इस तरह की आपदा से बचने के लिए ठोस और द्रूत कदम उठाने की जरूरत है.
शिवानंइ झा चंचल, डी-01/204, आइआइटी पटना

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