केंद्र सरकार ने आयकर विभाग के 12 भ्रष्ट अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत करने का सराहनीय निर्णय लिया है. वरिष्ठ और अहम पदों पर बैठे भारतीय राजस्व सेवा के इन दंडित अधिकारियों पर रिश्वतखोरी, उगाही, यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप हैं. वित्त मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत आयकर विभाग आर्थिक और वित्तीय संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मेहनत और ईमानदारी से अर्जित आय पर कर का भुगतान करनेवाले करदाताओं के बरक्स एक श्रेणी ऐसे लोगों की भी है, जो भ्रष्ट अधिकारियों से सांठ-गांठ कर करोड़ों रुपये की कर चोरी करते हैं.
वित्तीय लेन-देन और कराधान की प्रक्रिया को सुगम, सक्षम और पारदर्शी बनाने के लिए हाल के वर्षों में सरकार द्वारा अनेक पहलें हुई हैं. लेकिन, प्रशासनिक तंत्र में अगर भ्रष्टाचार और कदाचार का माहौल बरकरार रहेगा, तो सरकार की पहलकदमी बेअसर हो सकती है. ऐसे में केंद्र सरकार ने संकेत दे दिया है कि न तो भ्रष्टाचार को बर्दाश्त किया जायेगा और न ही भ्रष्ट अधिकारियों को बख्शा जायेगा. केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा 2018 में जनवरी से नवंबर तक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के विरुद्ध 206 मामले दर्ज कराये गये थे.
यह संख्या 2017 में 338, 2016 में 400 तथा 2015 में 441 रही थी. साल 2015 से 2018 के बीच केंद्र सरकार ने 23 मामलों में आरोपी 17 भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति भी दी थी. भ्रष्टाचार के आरोपी भारतीय पुलिस सेवा तथा भारतीय वन सेवा के कई अधिकारियों के साथ भी सरकार सख्ती से पेश आ चुकी है.
लेकिन नौकरशाही में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं, जिससे निपटना आसान नहीं है. सरकार को कार्रवाई करने में ज्यादा मुस्तैदी दिखाने की जरूरत है. केंद्रीय जांच ब्यूरो आधे से भी कम मामलों में सालभर के भीतर अभियोग पत्र दाखिल कर पाती है. अभी राजस्व सेवा के जिन अधिकारियों की आयकर विभाग से छुट्टी हुई है, उनमें से ज्यादातार लंबे समय से गंभीर आरोपों के घेरे में हैं.
उधर कानूनी पचड़ों में मामले लटके रहते हैं और इधर दागी अधिकारी पदों पर भी जमे रहते हैं. केंद्रीय सतर्कता आयोग भ्रष्टाचार के आरोपी 123 सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए सरकार की हरी झंडी का इंतजार कर रहा है. नियमों के मुताबिक, चार महीने के भीतर सरकार के संबद्ध विभागों को मंजूरी पर फैसला कर लेना चाहिए. इन अधिकारियों में प्रशासनिक सेवा में कार्यरत लोगों के अलावा केंद्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी हैं.
देश के पहले लोकपाल के रूप में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष की नियुक्ति से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की उम्मीदों को बल मिला है. परंतु, चार महीने बीत जाने के बाद भी इस संस्था में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का निर्धारण नहीं हो सका है. सेवा से हटाने जैसे कड़े फैसलों के साथ मामलों के निपटारे की व्यवस्था को भी दुरुस्त किया जाना चाहिए.
