पिछले दिनों तेलंगाना देश का 29वां राज्य बन गया. इतिहास गवाह है कि पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ज्यादा राज्य बनाने के पक्षधर नहीं थे, क्योंकि इससे देश की अखंडता को खतरा पैदा होता है. आज राजनीतिक दलों और उनके नेताओं द्वारा जो अलग राज्य की मांग की जा रही है, वह भाषा, धर्म, जाति पर ज्यादा आधारित लगती है.
क्या यह अपने राजनीतिक हितों के लिए देश को बांटना नहीं है? अगर छोटे राज्यों का निर्माण विकास के ख्याल से करना है, तो भौगोलिक क्षेत्र और आबादी को आधार बनाया जाना चाहिए. फिर छोटे राज्यों की तरफ से आग्रह आता है कि उनकी विधानसभा की सीटें बढ़ायी जायें. इस पूरी प्रक्रिया में जनता की राय को कोई महत्व नहीं दिया जाता. जनता सिर्फ मूकदर्शक बन कर रह गयी है. इस मामले में कोई जनता की भी सुनी जाये.
सौरभ रॉय, दुमका
