धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती एवं झारखंड स्थापना दिवस के पावन दिन को राज्य के पारा शिक्षकों ( शिक्षा मित्र) पर प्रशासन द्वारा लाठियां बरसाकर असंवेदनशीलता का परिचय दिया है.
हमारे सर्वप्रिय माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रगतिशील सोच पर रघुवर सरकार का यह रोड़ा अटकाना 2019 की झारखंड चुनाव की नजर से घातक साबित हो सकता है. इन शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए. विद्यालयों की गतिशीलता इन शिक्षकों के कारण ही है. यह कोई ढकी-छुपी बात नहीं है कि ज्यादातर विद्यालय इनके ही द्वारा संचालित हो पा रहे हैं.
सरकारी शिक्षकों की कमी की क्षतिपूर्ति इन्हीं गुरुओं के द्वारा हो पा रही हैं. अगर इन शिक्षकों के कदम आहत होकर विचलित हो जाये, तो राज्य के 80 फीसदी से अधिक विद्यालयों पर ताले लटक जायेंगे. शिक्षकों को इनका संवैधानिक अधिकार देकर माननीय मुख्यमंत्री अपने गुरु के ऋण से भी मुक्त हो सकते हैं. सरकार इस मसले पर सहानुभूतिपूर्ण नजरिए से विचार करे.
देवेश कुमार देव, इसरी बाजार, गिरिडीह
