कारोबार हो आसान

बीते चार सालों में आर्थिक सुधारों की गति तेज करने का एक अहम नतीजा यह हुआ है कि कारोबारी सुगमता के लिहाज से भारत इस अवधि में 65 पायदान की छलांग लगाते हुए, दुनिया में 77वें स्थान पर पहुंच गया है. निश्चित रूप से इस उपलब्धि ने सरकार का हौसला बढ़ाया है. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र […]

बीते चार सालों में आर्थिक सुधारों की गति तेज करने का एक अहम नतीजा यह हुआ है कि कारोबारी सुगमता के लिहाज से भारत इस अवधि में 65 पायदान की छलांग लगाते हुए, दुनिया में 77वें स्थान पर पहुंच गया है. निश्चित रूप से इस उपलब्धि ने सरकार का हौसला बढ़ाया है.

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में उद्योग लगाने, निवेश करने तथा व्यापार करने की स्थितियों की बेहतरी करने में और तेजी लाना चाहते हैं. उन्होंने कहा है कि सरकार बहुत जल्दी विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता सूची में भारत को 50 शीर्ष देशों में लाने तथा अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की दिशा में काम कर रही है. इस संबंध में नयी औद्योगिक नीति की तैयारी हो रही है और आगामी दिनों में इसका प्रारूप केंद्रीय कैबिनेट के सामने पेश किया जायेगा.

वाणिज्यिक, वित्तीय और व्यापारिक गतिविधियों में सुगमता का अर्थ यह है कि उद्योग लगाने, विनिर्माण करने, निवेश करने तथा आयात एवं निर्यात करने में प्रशासनिक स्वीकृति मिलने में देरी नहीं हो तथा नियमों, करों और शुल्कों की प्रणाली में जटिलता नहीं हो. अक्सर विरोधाभासी या अनावश्यक कानूनी प्रावधानों के कारण परियोजनाएं अधर में लटक जाती हैं. प्रशासन और नियमन के तंत्रों की जटिलता के कारण व्यापार के आकांक्षी लोगों को कई दफ्तरों पर दस्तक देनी पड़ती है. ऐसे माहौल में भ्रष्टाचार, देरी और घाटा होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं. प्रधानमंत्री ने उचित ही रेखांकित किया है कि वर्तमान सरकार के अब तक के कार्यकाल में 14 सौ से अधिक अनावश्यक कानूनों को रद्द किया गया है.

व्यावसायिक विवादों के निबटारे की अवधि 15 सौ दिनों से घटाकर 400 कर दिया गया है. पर्यावरण-संबंधी मंजूरी अब ऑनलाइन लेने की सुविधा है. वस्तु एवं सेवा कर, नोटबंदी, दिवालिया कानून तथा कालाधन रोकने जैसी पहलें मोदी सरकार के सुधार कार्यक्रम का महत्वपूर्ण तत्व हैं. हालांकि निर्यात और निवेश के मोर्चे पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल पायी है तथा नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदमों ने अर्थव्यवस्था को कुछ देर के लिए झटका दिया था, पर उपायों के सकारात्मक परिणाम अब धीर-धीरे सामने आने लगे हैं.

यह महत्वपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचलें अभी हमारी अर्थव्यवस्था पर बहुत असर नहीं डाल पायी हैं, लेकिन तेल की कीमतों में उथल-पुथल और रुपये के दाम में गिरावट निश्चित ही चिंता का कारण हैं. लेकिन इसके बावजूद आर्थिक वृद्धि का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है. रिजर्व बैंक और सरकार के बीच सामंजस्य का समाचार भी उत्साहवर्द्धक है.

आर्थिक विकास के इस प्रयास में केंद्र और राज्यों के बीच व्यापक तालमेल बनाने तथा व्यापारिक प्रतिस्पर्द्धा को जिले के स्तर पर ले जाने के सरकारी प्रयास भी सराहनीय हैं. रोजगार के अवसर पैदा करने और राष्ट्रीय समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि आर्थिक गतिविधियों के हर आयाम को बेहतर किया जाये.

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