विपक्ष भी अटल के चुंबकीय व्यक्तित्व का कायल था

आदर्श राजनीति के पितामह, भारत रत्न व तीन बार देश की बागडोर संभालने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे युग पुरुष का महाप्रयाण एक स्वर्णिम युग का अंत है. इसकी भरपाई करना मुमकिन नहीं. साहित्य, सियासी पटल व सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में अटल जी एक ऐसे संवेदनशील इंसान थे कि विपक्ष भी उनके […]

आदर्श राजनीति के पितामह, भारत रत्न व तीन बार देश की बागडोर संभालने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे युग पुरुष का महाप्रयाण एक स्वर्णिम युग का अंत है. इसकी भरपाई करना मुमकिन नहीं. साहित्य, सियासी पटल व सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में अटल जी एक ऐसे संवेदनशील इंसान थे कि विपक्ष भी उनके चुंबकीय व्यक्तित्व का कायल था.
भारत वर्ष के सामाजिक व राजनीतिक जीवन में रचनात्मक बदलाव के सूत्रधार अटल जी के बजाय और कौन हो सकता था. अटल जी ने अपने अटल फैसलों की बदौलत पूरे देश की तस्वीर ही बदल डाली. चार अक्तूबर, 1977 को बतौर विदेश मंत्री उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी भाषा में संबोधन देकर दुनिया भर में राष्ट्रभाषा का मस्तक ऊंचा किया.
1998 में राजस्थान के पोखरण में परमाणु परीक्षण कर राष्ट्र को शक्तिशाली देशों में शुमार किया. राजनीति की बजाय ‘राष्ट्रनीति’ में अटूट विश्वास रखने वाले अटल जी जैसे सर्वधर्म प्रिय, सर्वसमावेशी व अजातशत्रु युगों में जन्म लेते हैं.
नीरज मानिकटाहला, यमुनानगर (हरियाणा)

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