विगत मंगलवार मंगल मय नहीं रहा. हमने नवनिर्वाचित ग्रामीण विकास मंत्री गोपी नाथ मुंडे को खो दिया. एक सड़क दुर्घटना में जख्मी होने के बाद इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. उनके निधन से हर भारतीय दुखी है. उनके निधन की खबर पूरे देश में आग की तरह फैल गयी, तो जाहिर है पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी खबर पहुंची ही होगी.
महाराष्ट्र और बंगाल का जिक्र इसलिए क्योंकि कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक शाहरुख खान महाराष्ट्र निवासी हैं और मुंडे जी का भी राजनीतिक मंच महाराष्ट्र ही रहा था. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी केंद्र में मंत्री रही हैं और एक राजनैतिक दल की अध्यक्षा भी हैं. इसलिए इन दोनों का नैतिक फर्ज बनता था कि मुंडे जी के निधन के शोक में शामिल हों. राजनैतिक शुचिता भी यही कहती है. जहां इस चुनाव में भाजपा के लोगों ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और इनके परिवार पर व्यक्तिगत राजनीतिक हमले किये, बावजूद इसके राहुल गांधी मुंडे जी को श्रद्धांजलि देने भाजपा कार्यालय पहुंचे.
लेकिन इससे अलग बंगाल की मुख्यमंत्री और शाहरुख खान आइपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स की जीत का जश्न ईडेन गार्डेन में मनाते रहे. ममता बनर्जी राहुल गांधी से अधिक परिपक्व नेत्री हैं और मौके की नजाकत पहचानने में माहिर भी हैं तो फिर उनसे ऐसी चूक क्यों हुई? यह सब अगर वह जान-बूझ कर कर रही हैं तो यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा और भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी मानी जायेगी. दो दलों के बीच नीतियों का विरोध होता है, व्यक्तिगत नहीं. आखिर राजनैतिक शुचित भी कोई चीज है. क्या यह जश्न एक-दो दिनों के लिए टाला नहीं जा सकता था? यह जश्न जीत का नहीं, मानवता की दर्दनाक मौत का जश्न है.
गणोश सीटू, हजारीबाग
