लो फिर आया पर्यावरण दिवस!

आज विश्व पर्यावरण दिवस है. सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. लंबे-चौड़े भाषणों में पर्यावरण संरक्षण की नसीहतें दी जायेंगी. लेकिन जमीनी हकीकतों पर नजर डालें तो राजधानी रांची को पॉलीथीन मुक्त करने के सारे प्रयास फ्लॉप हो गये. न प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी दिखायी और न ही […]

आज विश्व पर्यावरण दिवस है. सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. लंबे-चौड़े भाषणों में पर्यावरण संरक्षण की नसीहतें दी जायेंगी. लेकिन जमीनी हकीकतों पर नजर डालें तो राजधानी रांची को पॉलीथीन मुक्त करने के सारे प्रयास फ्लॉप हो गये.

न प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी दिखायी और न ही इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर किसी सार्थक जनांदोलन का सृजन ही हो पाया. शहर के कई पेड़ आंधी-तूफान की भेंट चढ़ते जा रहे हैं तो कई पेड़ विज्ञापन बोर्ड-बैनरों-फ्लैक्स आदि की कीलों से धीमे जहर का शिकार हो रहे हैं. नये पौधरोपण का कहीं दर्शन नहीं हो रहा है. शहर का शो-पीस कांके रोड ‘प्रगति के पथ पर हरियाली की भेंट’ का एक उदाहरण बन चुका है. सड़कों-चौराहों पर दिन-उजाले में जलती बत्तियां किसी की नजर से छिपी नहीं हैं. लेकिन परवाह किसे है!

अजय झा, पिस्का मोड़, रांची

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