फिर इवीएम का मुद्दा!

कांग्रेस समेत 17 विपक्षी दल लोकसभा चुनाव इवीएम छोड़कर बैलेट पेपर से कराने के लिए चुनाव आयोग से मांग करने जा रहे हैं. जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, इवीएम का जिन्न निकलने लगा है. अगर राजनीतिक दल चुनाव आयोग पर सवाल उठते हैं, तो आयोग को जवाब देना चाहिए, ताकि लोगों का चुनाव […]

कांग्रेस समेत 17 विपक्षी दल लोकसभा चुनाव इवीएम छोड़कर बैलेट पेपर से कराने के लिए चुनाव आयोग से मांग करने जा रहे हैं. जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, इवीएम का जिन्न निकलने लगा है. अगर राजनीतिक दल चुनाव आयोग पर सवाल उठते हैं, तो आयोग को जवाब देना चाहिए, ताकि लोगों का चुनाव प्रणाली में विश्वास कायम रहे.
साल 2004 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 145 सीटें और बीजेपी 148 को सीटें मिली थीं. वहीं 2009 में कांग्रेस को 206 और बीजेपी को 116 सीटें इवीएम के जरिये ही मिली थीं. ऐसे में लगता है कि राजनीति साधने के लिए इवीएम का मुद्दा सहूलियत के हिसाब उठाया जा रहा है.
दूसरी ओर, रूस, नाइजीरिया, मलयेशिया जैसे देश भी इवीएम को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं. बैलेट पेपर से चुनाव करवाना नयी तकनीक के इस युग में हमें पीछे धकेल देगा. बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाओं को रोकना प्रशासन के लिए चुनौती होगी. विपक्षी दलों को इवीएम का मुद्दा छोड़कर जनता के मुद्दों को उठाना चाहिए.
महेश कुमार, सिद्धमुख, राजस्थान

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