एक सरकारी अधिसूचना ने शक, शिकायत और सियासत की आग को सिर्फ हवा ही नहीं दी, थोड़ा घी भी डाल दिया है. अब से यूपीएससी की परीक्षा पास किये बगैर भी कुछ लोगों को आइएएस बनने का मौका मिल सकता है.
अभी तक यूपीएससी देश के कई नामचीन लोगों की प्रशासनिक योग्यता और दक्षता को प्रमाणित कर चुका है जिनकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठे. इन परीक्षाओं से जुड़े युवाओं के त्याग, सपनों और अरमानों को नकारा नहीं जा सकता. जरा सोचिए अगर ऐसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में भी पिछला दरवाजा खोल दिया जाये, तो सियासत पर शक और शिकायत करने से किसे रोका जायेगा.
वह आयु वर्ग जिस पर देश नाज कर रहा है, निश्चित रूप से हताश होगा. सवाल यह है कि कहीं इन ‘प्रतिष्ठाओं’ को मलिन करने का यह राजनीतिक प्रयास तो नहीं है! शिक्षा के गिरते स्तर के बीच ‘अनुभव’ को तवज्जो देना शिक्षा प्रणाली की नींव को और भी कमजोर कर देगा. फैसले अगर सियासी होंगे तो शक और शिकायत होगी.
एमके मिश्रा, रांची
