संघ में हो मंथन

संघ प्रमुख मोहन भागवत अपने संबोधनों में लगातार यह कह रहे हैं कि हिंदू एक धर्म नहीं, संस्कृति है, तो अब समय आ गया है कि संघ इन वक्तव्यों को लागू भी करके दिखाए. अपनी स्थापना के बाद संघ में पहली बार बड़ा परिवर्तन अगर कोई दिखाई दिया, तो वह हाल ही में संघ गणवेश […]

संघ प्रमुख मोहन भागवत अपने संबोधनों में लगातार यह कह रहे हैं कि हिंदू एक धर्म नहीं, संस्कृति है, तो अब समय आ गया है कि संघ इन वक्तव्यों को लागू भी करके दिखाए.
अपनी स्थापना के बाद संघ में पहली बार बड़ा परिवर्तन अगर कोई दिखाई दिया, तो वह हाल ही में संघ गणवेश में किया गया बदलाव था. प्रणव मुखर्जी संघ को समझाने का प्रयास कर रहे थे कि संघ को नयी पहचान बनाते हुए आगे बढ़ना है तो, उसे अपनी मूल आचार-संहिता में परिवर्तन करना होगा. समय के साथ परिवर्तन ही किसी संगठन की जीवंतता को बनाये रख सकते हैं.
मुखर्जी संघ से संबंधित कई कड़वी सच्चाइयों को उजागर कर गये. समय के साथ संघ कहां अपनी मूल अवधारणा से भटका, उसकी वर्तमान तस्वीर कैसी है, इसे वे बखूबी बता गये. उम्मीद है संघ में इन मुद्दों पर मंथन होगा.
डॉ हेमंत कुमार, भागलपुर

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