निपाह वायरस का आतंक

हम एक बार फिर एक ऐसे वायरस की चपेट में आ रहे हैं, जो हमारी मौत का सबब है और उससे संक्रमित होने के बाद बचाव का कोई उपाय हमारे स्वास्थ्य विज्ञान के पास नहीं है. यह है निपाह वायरस. यह एक ऐसा वायरस है, जो मनुष्य को 48 घंटे के अंदर कोमा में पहुंचा […]

हम एक बार फिर एक ऐसे वायरस की चपेट में आ रहे हैं, जो हमारी मौत का सबब है और उससे संक्रमित होने के बाद बचाव का कोई उपाय हमारे स्वास्थ्य विज्ञान के पास नहीं है. यह है निपाह वायरस. यह एक ऐसा वायरस है, जो मनुष्य को 48 घंटे के अंदर कोमा में पहुंचा सकता है.
लोग इससे मर रहे हैं और देश के उन हिस्सों के भी लोग भी आतंकित हैं, जहां इसका वायरस अब तक नहीं पहुंचा है. अब तक इसके कुछ लक्षण चिह्नित किये गये हैं, मगर पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि इस वायरस की वजह तथा इसके और क्या-क्या लक्षण हैं. अभी इस पर शोध चल रहा है. कुल मिला कर स्थिति भयावह है.
ऐसे में हमारे पास एक ही उपाय है कि हम फलों और सब्जियों के इस्तेमाल में सावधानी बरतें. जानवरों के खाये जाने के निशानवाली सब्जिओं और फलों को न खाएं. खाने से पहले फलों को अच्छी तरह धो लें और बाहर के कटे फल और जूस से फिलहाल परहेज करें.
साथ ही यह सवाल भी है कि जहां हम पुरानी महामारियों पर विजय प्राप्त कर रहे हैं, वहीं महामारी के इन नये रूपों का जन्म आखिर कैसे हो रहा है? कहीं यह प्रदूषण और रासायनिक कचरों के प्रसार का नतीजा तो नहीं है?
गौरव कुमार निशांत,वाराणसी

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