यह दुखद है कि स्टूडेंट्स के टेट पास करने के प्रमाण-पत्र की मान्यता खत्म हो गयी. उन्हें पांच साल हो गये इंतजार करते हुए, पर शिक्षा विभाग को फुर्सत ही नहीं मिली उन्हें नियुक्त करे. टेट पास स्टूडेंट्स आस लगाये बैठे रहे कि आज नहीं तो कल उनकी नौकरी पक्की है, पर शिक्षा विभाग ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. दूसरी ओर स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हैं.
यही कारण है कि बच्चे स्कूलों में कम, कोचिंग सेंटरों में ज्यादा दिखते हैं. ऐसे में सरकार को बड़ा कदम उठाना होगा और नेट की तर्ज पर टेट के प्रमाण-पत्रों की मान्यता को स्थायी बनाना होगा. शिक्षकों की नियुक्ति में विभाग के सुस्त और लापरवाह रवैये पर अंकुश लगाना होगा, ताकि ऐसी दुखद परिस्थिति से बचा जा सके.
सुहाना किस्कू, इ-मेल से.
