देश में दुष्कर्म और हत्या जैसी हो रही घटनाओं के मद्देनजर यह जरूरी है कि समाज अपने विचार-विमर्श में यौन शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाये. दुष्कर्म जैसे कुकृत्य को सिर्फ कानून द्वारा नहीं रोका जा सकता.
इसके लिए समाज एवं परिवार को भी अपने दायित्व को समझना होगा. बच्चों में नैतिक मूल्यों के विकास पर जोर देने और महिलाओं के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ ही स्कूली शिक्षा में ऐसे पाठ्यक्रमों की आवश्यकता है, जो समाज की समरसता को बनाये रखने में मदद करे.
पूंजीवादी मूल्यों के बढ़ने से पारिवारिक दूरियां बढ़ी है. इसलिए संस्कार आधारित व्यावहारिक ज्ञान गौण हो रहा है. इसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ रहा है. अतः सुधारों के प्रत्येक मोर्चे पर तत्परता दिखाने की आवश्यकता है. इन सुधारवादी कदमों से ही समतामूलक, न्यायपूर्ण और समरस समाज की स्थापना होगी.
रवि राज, इमेल से
