प्लास्टिक से दूरी

प्लास्टिक का प्रयोग दैनिक जीवन का मुख्य हिस्सा बन गया है. टूथब्रश से लेकर कंप्यूटर तक सभी चीजें प्लास्टिक से बनी होती हैं.प्लास्टिक की थैली का प्रयोग सबसे ज्यादा बाजार से समान लाने-ले जाने के लिए किया जाता है, लेकिन यही प्लास्टिक भविष्य के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक भारत […]

प्लास्टिक का प्रयोग दैनिक जीवन का मुख्य हिस्सा बन गया है. टूथब्रश से लेकर कंप्यूटर तक सभी चीजें प्लास्टिक से बनी होती हैं.प्लास्टिक की थैली का प्रयोग सबसे ज्यादा बाजार से समान लाने-ले जाने के लिए किया जाता है, लेकिन यही प्लास्टिक भविष्य के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख टन से अधिक प्लास्टिक उत्पादन होता है. शादी-विवाह के कार्यक्रम संपन्न होने के बाद, कार्यक्रम स्थल पर ज्यादातर प्लास्टिक गिलास, कप व ‍प्लेट बच जाता है.
ऐसे कचरे को जलाने पर जहरीला धुंआ निकलता है अन्यथा ज्यादातर कचरा झील-तालाब के आसपास इकट्ठा हो जाता है. भारत के 11 राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में करीब 312 गैरकानूनी प्लास्टिक के कारखाने हैं, जहां सरकार की नजर नहीं जाती है. इस विषय पर लोगो में जागरूकता लानी होगी ताकि लोग पॉलीथिन का इस्तेमाल कम करें.
महेश कुमार, इमेल से

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