पर्यावरण के प्रति संवेदना दिखाने के लिए बधाई. सड़क निर्माण के लिए बिन सोचे समझे पेड़ों की क्षति अपूर्णीय है. नि:संदेह यह एक फलदार वृक्ष की नृशंस हत्या के समान है.
यह संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के बीच समन्वयता की कमी का ही नतीजा है. इसको क्रिमिनल नेग्लिजेंस भी कहा जा सकता है. ऐसी लापरवाही राजधानी के वीवीआइपी क्षेत्र में हो जाती है. आखिर क्या कर रहे हैं वन विभाग के अधिकारी? पेड़ों पर प्रचार सामग्री चिपका रहता है. यह पेड़ों के लिए धीमा जहर होता है, पर ऐसा करनेवालों पर कोई कार्रवाई नहीं होता है.
प्लास्टिक बैन भी पूरी तरह फ्लॉप हो चुका है. पर्यावरण संरक्षण पर केवल खानापूर्ति हो रही है. बड़े दुख की बात है कि रांची क्या थी और अब क्या हो गयी है! उम्मीद है राज्य सरकार व वन विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कार्य करेंगे.
अजय झा, पिस्का मोड़, रांची
