आसाराम को सजा हुई है और वे कुकृत्य के कारण जेल में बंद रहेंगे. 77 साल की उम्र में उन्हें सजा हुई है यानी भुक्तभोगी को इतनी देर से न्याय मिला. देश में बाबागिरी अब एक धंधा बन गया है. और वे काले धन को खपाने का माध्यम भी बनते जा रहे हैं.
अफसोस है कि साधुत्व की आड़ में कुछ लोग साधारण जनमानस की संवेदना के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. कोई भी सजा उनके गुनाहों की बराबरी नहीं कर सकती, पर प्रशासन को ऐसे बाबाओं पर हर हाल में कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि इनके धंधे को रोका जा सके. एक मुहिम के तहत इन बाबाओं पर कानूनी शिकंजा कसने की जरूरत है.
अध्यात्म के नाम पर ठगी कर पैसा और रसूख कमाने वाले बाबाओं पर कोई दया नहीं दिखानी चाहिए. ऐसे बाबा देशद्रोही की कोटि के लोग हैं. राजनैतिक लाभ के लिए किसी भी ठग या दुराचारी को संरक्षण देने से बचना होगा. यह प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी.
डॉ मनोज ‘आजिज’, इमेल से
