आज हमारे देश की जनता का हाल उस मरीज की तरह हो गयी है, जिसे समस्या दिल में दर्द की है और डाॅक्टर इलाज के नाम पर उसके पैर काट रहे हों. अब उसका सारा ध्यान कटे पैर में होगा और उसे दिल के दर्द का आभास नहीं होगा. देश के राजनीतिज्ञ भी हमारी समस्याओं का समाधान करने के बजाय हमें बेकार के मुद्दे व बहस में उलझाये रखना चाहते हैं.
हमें यह समझना होगा कि लड़कियों के प्रति हो रही यौन हिंसा किसी जाति या धर्म विशेष की समस्या नहीं है, बल्कि यह समस्या समस्त मानव जाति की है. जब भी रेप की कोई घटना सामने आती है, तब देश के कुछ बुद्धिजीवी इसके लिए कभी कपडे़, कभी संस्कार, तो कभी जाति, धर्म और कभी कुछ को जिम्मेदार मानते हैं. इससे हम सबका ध्यान मुख्य समस्या से हटा दिया जाता है और हम सब इस साजिश से अंजान आपस में बेकार की बहसों में उलझे रह जाते हैं.
सिर्फ सोशल मीडिया में पोस्ट, प्रोफाइल फोटो बदलने से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता है. जरूरत है हम सबको इस गंभीर मुद्दे के खिलाफ एकजुट होकर इसका मजबूती से सामना करने की. आखिर कब तक इलाज के नाम पर पैर कटाते रहेंगे?
शिल्पा कुमारी महतो, चक्रधरपुर
