काले हिरन मामले में जिस तरह से नीलम, तब्बू, सोनाली बेंद्रे एवं सैफ अली को बरी और सलमान को पांच वर्ष की सजा सुनायी गयी थी, वह नाइंसाफी है.
अच्छा हुआ जोधपुर की एक अन्य अदालत से सलमान को बेल मिल गया. आशा है, आगे चलकर यही अदालत या उच्च न्यायालय उन्हें भी बरी कर देगी. राजस्थान का बिश्नोई समाज इसे झूठ-मूठ की मूंछ की लड़ाई मानकर लड़ रहा है. यहां 1984 में सिक्खों एवं 2002 में मुसलमानों को मारने-मरवाने वाले सजा के बदले राज भोग रहे हैं. जाति के नाम पर हिंसक होनेवालों को सजा नहीं मिल पा रही है.
सजा सुनानी ही है, तो केवल हिरन ही क्यों, इस देश में जितने भी पशु-पक्षियों की अब तक हत्या हुई है या रोज खाने के नाम पर कत्ल किये जा रहे हैं, उन तमाम के हत्यारों को पहले जेल भेजना चाहिए. जान की कीमत सबके लिए बराबर है. सलमान ने अगर गलती की भी है, तो वह इतनी बड़ी नहीं है कि उन्हें जेल की सजा मिले.
जंग बहादुर सिंह, इमेल से
