बेरोजगारी की भयावहता

रेलवे में बहुत दिनों से रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकला है. करीब 90 हजार वर्ग तीन और चार श्रेणियों के लिए यह विज्ञापन आया है. 3 करोड़ 80 लाख बेरोजगार लोगों ने इसके लिए आवेदन डाले हैं. लगभग 300 से अधिक लोगों पर एक व्यक्ति नियुक्त होना है. बेरोजगारी की भयावहता […]

रेलवे में बहुत दिनों से रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकला है. करीब 90 हजार वर्ग तीन और चार श्रेणियों के लिए यह विज्ञापन आया है. 3 करोड़ 80 लाख बेरोजगार लोगों ने इसके लिए आवेदन डाले हैं.
लगभग 300 से अधिक लोगों पर एक व्यक्ति नियुक्त होना है. बेरोजगारी की भयावहता का इससे अंदाज लगाया जा सकता है. प्रत्येक साल करीब एक करोड़ नये बेरोजगार इस पंक्ति में जुड़ रहे हैं. हमारी शिक्षा प्रणाली रोजगारोन्मुखी नहीं है. सीबीएसई जैसी प्रतिष्ठित संस्था भी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में चूक रही है. सरकार कौशल विकास योजना के अंतर्गत रोजगार का अवसर बढ़ाने की कोशिश कर रही है और उसमें कुछ हद तक सफल भी दिखती है, लेकिन सुरसा की भांति बेरोजगारों की बढ़ती हुई फौज देश और सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है.
युगल किशोर, इमेल से

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