कार्यपालिका का हस्तक्षेप

सर्वोच्च न्यायालय के वरीय न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने एक बार फिर कार्यपालिका के हस्तक्षेप पर सवाल खड़े किये हैं. इससे पहले जनवरी में जस्टिस चेलमेश्वर सहित चार वरीय न्यायमूर्तियों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली और मुख्य न्यायाधीश के विवेकाधिकार पर गंभीर सवाल किये गये थे, जो आजतक अनसुलझे लगते हैं. एक बार फिर जस्टिस चेलमेश्वर ने […]

सर्वोच्च न्यायालय के वरीय न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने एक बार फिर कार्यपालिका के हस्तक्षेप पर सवाल खड़े किये हैं. इससे पहले जनवरी में जस्टिस चेलमेश्वर सहित चार वरीय न्यायमूर्तियों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली और मुख्य न्यायाधीश के विवेकाधिकार पर गंभीर सवाल किये गये थे, जो आजतक अनसुलझे लगते हैं.
एक बार फिर जस्टिस चेलमेश्वर ने कार्यपालिका के बढ़ते हस्तक्षेप पर अपनी नाराजगी जाहिर की है और इसे प्रजातंत्र के लिए नुकसानदेह एवं घातक बताया है. कोलेजियम द्वारा की गयी अनुशंसा पर कार्यपालिका कोई निर्णय नहीं ले पा रही है.
उन्होंने इस पर भी एतराज जताया कि योग्यता और क्षमता के ऊपर अन्य गुणों को तरजीह दी जा रही है. यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं. इस पर गंभीरता से विचार विमर्श करने की जरूरत लगती है. न्यायपालिका की सर्वोच्चता स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है.
युगल किशोर, इमेल से

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