झारखंड में दारोगा नियुक्ति नियमावली कुप्रबंधन का ही परिणाम है कि एक होनहार नौजवान ने दारोगा बनने के पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया.
यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना दारोगा शारीरिक परीक्षा के दौरान रांची में हुई. इसके लिए पूर्णरूप से झारखंड सरकार के अधिकारी दोषी हैं और उन पर केस दर्ज होना ही चाहिए. कड़ी धूप में 400 मीटर गोलाकार क्षेत्र में दौड़ करवाना तकनीकी रूप से न्यायसंगत नहीं है. इन्होंने दारोगा नियुक्ति नियमावली ऐसी बनायी कि हजारों छात्रों को फार्म भरने से ही वंचित कर दिया. फिर प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ नहीं दिया.
मुख्य परीक्षा परिणाम में भी एसटी, एससी व बीसी-2 में कम रिजल्ट देकर लगभग दो हजार छात्रों को बाहर का रास्ता दिखाया. अगर नौकरी नहीं देनी है, तो फिर सपने क्यों दिखा रही है सरकार? आंकड़ों के अनुसार दौड़ में 30-40% ही सफल हो पा रहे हैं. यह परिणाम सरकार व पुलिस विभाग के कुप्रबंधन का ही प्रतिफल है, नहीं तो इतने सारे नौजवान बेहोश और असफल नहीं होते.
अजय पटेल, इमेल से
