परीक्षा को मजाक न बनने दें

किसी भी देश की शक्ति युवा होते हैं. उन पर देश का भविष्य निर्भर करता है. पर दुख की बात है कि उनके ही भविष्य के साथ क्रूर मजाक किया जा रहा है. कर्मचारी चयन आयोग द्वारा की गयी धांधली का मुद्दा गहराया है और शर्म की बात है कि ऐसा पहली बार नहीं है. […]

किसी भी देश की शक्ति युवा होते हैं. उन पर देश का भविष्य निर्भर करता है. पर दुख की बात है कि उनके ही भविष्य के साथ क्रूर मजाक किया जा रहा है. कर्मचारी चयन आयोग द्वारा की गयी धांधली का मुद्दा गहराया है और शर्म की बात है कि ऐसा पहली बार नहीं है.
देश में परीक्षा प्रणाली को मजाक बना दिया गया है. जहां देखो रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का बोलबाला नजर आता है. जिन बच्चों को विषय का नाम भी नहीं पता होता, वह बोर्ड की परीक्षा में टॉप कर लेता है. आखिर परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होते कैसे हैं? यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है और बिना बड़े अधिकारियों और नेताओं की संलिप्तता के ऐसा होना मुमकिन नहीं. परीक्षा में पास करवाने वाले लोगों का गिरोह फल फूल रहा है.
हमारे देश मे तकनीक इतनी उन्नत है कि इस समस्या को आराम से रोका जा सकता है. सरकार की एक ईमानदार कोशिश की जरूरत है. सरकार ने उम्मीद है कि किसी भी कीमत पर परीक्षाओं को मजाक न बनने दें. युवा शक्ति को मजबूती प्रदान करें.
डॉ शिल्पा जैन सुराणा, इमेल

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