त्रिपुरा में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों में अजीब-सी बेचैनी हो गयी है. बेचैनी का आलम यह है कि एक दूसरे के प्रबल विरोधी सपा और बसपा भी भाजपा के विरुद्ध एकजुट हो गये हैं.
विभिन्न वामपंथी दलों और छद्म सेकुलर पार्टियों ने भाजपा की जीत पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाये हैं, लेकिन भाजपा की विजय के बाद त्रिपुरा की जनता की ओर से जो प्रतिक्रिया आयी है, उसमें 25 वर्ष बाद उन्हें मिली जनतांत्रिक आजादी की खुशी का संदेश है. इस संदेश की अहमियत न केवल दलीय राजनीतिक व्यवहारों के लिए है, बल्कि भारतीय जनतंत्र के लिए भी यह बेहद खास है.
सिद्धनाथ मिश्रा, इमेल
