श्रीश्री का बयान

जब तक श्रीश्री रविशंकर अयोध्या विवाद को अदालत के बाहर सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, तब तक लग रहा था कि वह कुछ अच्छा कर रहे हैं, मगर अब वह भी उल्टी-पुल्टी बातें करने लगे हैं. दोनों पक्ष अदालत के फैसले को मानने को तैयार भी हैं. ऐसे में श्रीश्री का कहना कि अगर […]

जब तक श्रीश्री रविशंकर अयोध्या विवाद को अदालत के बाहर सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, तब तक लग रहा था कि वह कुछ अच्छा कर रहे हैं, मगर अब वह भी उल्टी-पुल्टी बातें करने लगे हैं. दोनों पक्ष अदालत के फैसले को मानने को तैयार भी हैं. ऐसे में श्रीश्री का कहना कि अगर अदालत का फैसला बाबरी मस्जिद के पक्ष में गया, तो देश में महाभारत हो जायेगा, सीरिया के गृह युद्ध जैसे हालात बन जायेंगे इत्यादि उचित नहीं है.

क्या इस तरह बोल कर श्रीश्री अदालत को धमकी दे रहे हैं या राजनीति में आना चाहते हैं? चलन तो यही है कि जब तक कोई मसला अदालत के अधीन है, तो उस पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की जाती है. श्रीश्री को सबसे पहले यह बतलाना चाहिए कि एनजीटी द्वारा जो अर्थदंड उन पर लगाया गया था, उस पर उन्होंने क्या किया? क्या उन्होंने दंड की राशि जमा कर दी है?

जंग बहादुर सिंह, इमेल से

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