बेबस मरीजों का कोई नहीं

झासा के सचिव को निर्धन एवं बेबस रोगियों की ओर से ढेर सारी बधाइयां, क्योंकि उन्होंने डॉक्टरों की हड़ताल को शत-प्रतिशत सफल करा दिया. इनसे भी ज्यादा बधाई के पात्र तो जेडीए के सचिव हैं. इन्होंने न केवल हड़ताल सफल करा दी, बल्कि एक कदम आगे बढ़कर इमरजेंसी से भी अपने डॉक्टरों को बुलवा लिया […]

झासा के सचिव को निर्धन एवं बेबस रोगियों की ओर से ढेर सारी बधाइयां, क्योंकि उन्होंने डॉक्टरों की हड़ताल को शत-प्रतिशत सफल करा दिया. इनसे भी ज्यादा बधाई के पात्र तो जेडीए के सचिव हैं.
इन्होंने न केवल हड़ताल सफल करा दी, बल्कि एक कदम आगे बढ़कर इमरजेंसी से भी अपने डॉक्टरों को बुलवा लिया और परोक्ष रूप से 12 मरीजों को मारा या उन्हें मरने से नहीं बचा पाये. हालांकि रिम्स प्रशासन का कहना है कि ये सामान्य मौतें थीं. डाॅक्टरों का भी क्या खूब विचार है कि ये अपने किसी भी रोष या असंतोष के लिए गरीब या बेबस मरीजों पर ही निशाना साधते है. ऐसा थोड़े है कि इस अवधि में कोई मंत्री, विधायक, उच्च अधिकारी या धनवान की भी चिकित्सा नहीं करेंगे.
अखबार ने हड़ताल के समय के रोते बिलखते ,कराहते, तड़पते बच्चों सहित कई मरीजों एवं उनके परिजनों के फोटो प्रकाशित किये हैं. पता नहीं इनलोगों को कब होश आयेगा कि निर्धन, गरीब व बेबस मरीजों का दोष क्या है?
पारस नाथ सिन्हा, इमेल से

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