पत्थलगड़ी को लेकर राजनीति

पत्थलगड़ी को लेकर जिस तरह की राजनीति हो रही है वह अति निंदनीय है. यह कोई देशद्रोही या सरकार विरोधी गतिविधि नहीं है. यह तो सदियों से चली आ रही आदिवासियों की परंपरा है. इसमें तो बस आदिवासियों को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लेख मात्र है. पत्थलगड़ी के माध्यम से संवैधानिक अधिकारों के प्रति […]

पत्थलगड़ी को लेकर जिस तरह की राजनीति हो रही है वह अति निंदनीय है. यह कोई देशद्रोही या सरकार विरोधी गतिविधि नहीं है. यह तो सदियों से चली आ रही आदिवासियों की परंपरा है. इसमें तो बस आदिवासियों को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लेख मात्र है.
पत्थलगड़ी के माध्यम से संवैधानिक अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है तो इसमें गलत क्या है? यह सरकार की गलत नीतियों से आदिवासियों में जो असंतोष पैदा हो रहा है उसका अहिंसात्मक विरोध है.
आदिवासी तो आदिकाल से ही शांतिपूर्वक जीवन जीना चाह रहे हैं लेकिन बाह्य शक्तियों ने उनकी जीवनशैली,परंपरा तथा अस्मिता को तहस-नहस करके रख दिया है. उनका विकास कम शोषण अधिक हो रहा है, इन्हीं कारणों से वे पत्थलगड़ी कर सरकार को अपने अधिकारों का स्मरण दिला रहे हैं. सरकार को आदिवासियों की भावना को समझना चाहिए.
अनुराग हेंब्रम, इमेल

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